20 साल की उम्र, जर्मन बंकर और विक्टोरिया क्रॉस: वीर गब्बर सिंह नेगी की वो शौर्यगाथा
सोचिए, जिस उम्र में आज के युवा कॉलेज लाइफ एंजॉय करते हैं, दोस्तों के साथ घूमने का प्लान बनाते हैं या करियर की उलझनों में उलझे होते हैं... उस उम्र में उत्तराखंड के एक 20 साल के नौजवान ने ऐसा पराक्रम दिखाया कि दुश्मन सेना भी दंग रह गई।
हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के वीर सपूत राइफलमैन गब्बर सिंह नेगी की, जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अपनी बहादुरी से इतिहास रच दिया।
⚔️ जब 20 साल के जवान ने दुश्मन के बंकरों में मचा दी थी हलचल
साल 1915 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फ्रांस के न्यूवे चैपल क्षेत्र में भीषण लड़ाई चल रही थी। युद्ध के बीच जब उनके कमांडर वीरगति को प्राप्त हुए, तब गब्बर सिंह नेगी ने पीछे हटने के बजाय मोर्चा खुद संभाल लिया।
उन्होंने दुश्मन के ट्रेंच में घुसकर अद्भुत साहस दिखाया और जर्मन सैनिकों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। उनकी वीरता ने पूरी बटालियन का मनोबल बढ़ा दिया।
🇮🇳 “वीरता उम्र की मोहताज नहीं होती… यह देशप्रेम की ताकत होती है।”
🏅 विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित
10 मार्च 1915 को युद्ध के मैदान में लड़ते हुए गब्बर सिंह नेगी वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी असाधारण बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत ब्रिटेन का सर्वोच्च वीरता सम्मान “Victoria Cross” प्रदान किया गया।
उनकी वीरता आज भी भारतीय युवाओं और सेना के जवानों को देशसेवा के लिए प्रेरित करती है।
🌄 उत्तराखंड की वीरभूमि की अमर प्रेरणा
उत्तराखंड के चम्बा (टिहरी गढ़वाल) में आज भी उनकी याद में मेले और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लंदन के मेमोरियल में भी उनका नाम सम्मान के साथ दर्ज है।

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