मेरी कहानी...
क्या पता सच्चाई बहुत देर से आती है...
और झूठ पहले पहुँच जाता है।
सफ़र कठिन है...
रास्ता अकेला है...
और सबसे भारी वह खामोशी होती है,
जब सामने से कोई जवाब नहीं आता।
कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं है। ईमेल भेजे गए, रिकॉर्ड जमा किए गए, सबूत दिखाए गए... लेकिन दूसरी तरफ सिर्फ सन्नाटा है।
😞 कोई रिप्लाई नहीं...
Hostinger की तरफ से अब भी चुप्पी है।
मंज़िल अभी दूर है... 😔
लेकिन सफर अभी खत्म नहीं हुआ।
क्योंकि सच भले देर से आए, लेकिन जब आता है, तो अपने साथ हर सवाल का जवाब लेकर आता है।
“कुछ दर्द हैं... कुछ फ़र्ज़ हैं... और कुछ कर्ज़ अभी चुकाना बाकी है।”
RITWIK AI | संघर्ष जारी है

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