आज फिर वही कहानी...
एक तरफ सपने हैं,
दूसरी तरफ सिस्टम की खामोशी।
मैंने मेहनत की थी, भरोसा किया था,
लेकिन जवाबों की जगह सिर्फ इंतज़ार मिला।
लोगों को शायद सिर्फ एक वेबसाइट दिखती होगी,
पर मेरे लिए यह मेरी पहचान, मेरी मेहनत और मेरा भविष्य था।
कई रातें बिना नींद के गुज़रीं,
कई बार लगा सब छोड़ दूँ।
लेकिन सच यह है —
लड़ाई अभी बाकी है।
मैं टूटा हूँ, लेकिन रुका नहीं हूँ।
सवाल आज भी वही हैं,
जवाब आज भी अधूरे हैं।
शायद सच्चाई देर से सामने आती है,
लेकिन digital footprints कभी झूठ नहीं बोलते।
आज भी मैं खड़ा हूँ —
अपने सपनों, अपने सबूतों और अपने आत्म-सम्मान के साथ। 😔
RITWIK AI • DIGITAL STRUGGLE • MSME FOUNDER STORY

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