डिजिटल चेकमेट
जब Silence भी दर्द देने लगे
“झूठ को सच कहने की कलाकारी नहीं आती मुझे…”
कई बार silence सबसे ज्यादा दर्द देता है।
जब मेहनत दिख नहीं रही होती… जब सवालों के जवाब अधूरे होते हैं… जब system बार-बार टूटता है… और फिर भी इंसान अगले दिन उठकर काम करता है।
मैं perfect नहीं हूँ। लेकिन एक चीज़ जरूर जानता हूँ —
ज़िंदगी के कुरुक्षेत्र में कभी-कभी इंसान खुद को अभिमन्यु की तरह घिरा हुआ महसूस करता है।
शायद बचाने कोई न आए। लेकिन मैदान छोड़ना भी नहीं आता।
गद्दारी नहीं आती। ना अपने काम से। ना अपने सपनों से। ना उन लोगों से जिन्होंने भरोसा किया।
Documentation इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि सच को याद रखने के लिए proof चाहिए होता है।
और शायद founder life का सबसे कठिन हिस्सा यही है — अंदर से टूटते हुए भी बाहर से खड़े रहना।
लेकिन सफर अभी खत्म नहीं हुआ।
कुछ कर्ज हैं। कुछ फर्ज हैं। और कुछ सपने अभी बाकी हैं। 🙏

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