कठिन है… लेकिन अभी मेरा दौर बाकी है
कभी-कभी दुनिया को लगता है कि हम हार गए हैं, लेकिन असल में ज़िंदगी हमें हर मोर्चे पर आज़मा रही होती है।
जब जेब खाली हो, सपने पहाड़ जैसे ऊँचे हों, और ज़िम्मेदारियाँ कंधों पर पत्थर बनकर बैठ जाएँ — तब मुस्कुराना भी एक युद्ध जीतने जैसा लगता है।
लोग कहते हैं: “वक्त बदल जाएगा…” लेकिन वे नहीं जानते कि रात के अंधेरे में वही इंसान जागता है जो EMI, server errors, टूटते भरोसे और अधूरे कामों का हिसाब अकेले करता है।
आज हर notification एक नई चुनौती लगती है। हर अनजान कॉल दिल की धड़कन बढ़ा देती है।
दुनिया को लगता है मैं online हूँ, active हूँ, काम कर रहा हूँ — लेकिन स्क्रीन की उस रोशनी के पीछे, मैं खुद को फिर से जोड़ने की कोशिश कर रहा हूँ।
हाँ, लड़ाई कठिन है। Pressure भी है। Uncertainty भी है। लेकिन मैं रुकूँगा नहीं। मैं झुकूँगा नहीं।
क्योंकि ज़िम्मेदारियाँ इंसान को हार मानना नहीं सिखातीं।
अगर आज मैं टूटता हुआ दिख रहा हूँ, तो याद रखना — बीज भी मिट्टी में दबकर ही पेड़ बनता है।

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